आज़ादी की लड़ाई के कुछ भूले बिसरे योद्दा
आज़ादी की लड़ाई के कुछ भूले बिसरे योद्दा जिन्होने जीवन दे कर हमे आज़ादी दी... दुर्गा भाभी [7 अक्टूबर 1902- 14 अक्टूबर 1999] भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रान्तिकारियों की प्रमुख सहयोगी थीं। 18 दिसम्बर 1928 को भगत सिंह ने इन्ही दुर्गा भाभी के साथ वेश बदल कर कलकत्ता-मेल से ़यात्रा की थी। बेहद निडर और साहसी दुर्गा भाभी का काम साथी क्रांतिकारियों के लिए राजस्थान से पिस्तौल लाना व ले जाना था। चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से लड़ते वक्त जिस पिस्तौल से खुद को गोली मारी थी उसे दुर्गा भाभी ने ही लाकर उनको दी थी। उस समय भी दुर्गा भाभी उनके साथ ही थीं। 14 अक्टूबर 1999 को 97 वर्ष की आयु में उनका निधन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में हो गया। [सुशीला दीदी] हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की बेहदसक्रिय सदस्य थीं। लाला लाजपत राय के हत्यारे सॉन्डर्स को मौत के घाट उतारने के बाद उन्होंने ही कलकत्ता में भगत सिंह के ठहरने की व्यवस्था की थी। 1 अक्टूबर 1933 को उन्होंने यूरोपीय सार्जेट टेलर को खत्म करने में भी उनकी प्रमुख ...